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काली किताब के उपाय

- काली किताब
काली किताब के उपाय

काली किताब के उपाय/उपचार

काली किताब के उपाय – काली किताब हिंदू ज्योतिष और हस्तविद्या पर लिखी उर्दू की पाँच पुस्तकों का एक सेट है जो 19वीं शताब्दी में लिखी गई और यह समुद्रिका शास्त्र पर आधारित है। इसकी शैली काव्य की है, इसमें दर्शन की बारीकियों के साथ–साथ परालौकिक रहस्य, समस्याओं और उनके उपाय सम्मिलित हैं। इसकी उत्पत्ति फारसी मूल से हुई मानी जाती है। इसने उपचारात्मक ज्योतिष के क्षेत्र की ओर  लोगों को प्रेरित किया, जो काली किताब के उपचार के रूप में प्रसिद्ध है। इसमें कुंडली या जन्म कुंडली में विराजमान विभिन्न पीड़ित ग्रहों के लिए साधारण उपाय दिए गए हैं। यह सालों से क्षेत्रीय लोक परंपराओं का भाग बनी हुई है, जिसमें भारत और पाकिस्तान सम्मिलित हैं। इस लेख में यह बताया गया है कि आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

काली किताब के उपाय

काली किताब के उपाय

यह टोने टोटकों जैसे हैं, जो हिंदी में दिए गए हैं। इन्हें वैदिक उपचार या इलाज के तौर पर भी देखा जा सकता है। यह एक ज्योतिष पुस्तक है जो ज्योतिष उपकरण या खगोल ज्योतिष के समान है।

काली किताब वैदिक ज्योतिष की एक उल्लेखनीय शाखा है।

5 पुस्तकों का संग्रह, जो 1939-1952 की अवधि में लिखा गया, काली किताब कहलाता है। यह पुरातन उर्दू भाषा में लिखी गईं हैं।

ज्योतिष के इतिहास में पहली बार काली किताब ने त्वरित और सस्ते उपायों के साथ कुंडली विश्लेषण के एक नवीन रूप को पेश किया।

इन किताबों की रचनाकारिता के संबंध में मतभेद है। फिर भी जब इन किताबों पर अनुसंधान और विश्लेषण किया गया, तो हैरतअंगेज़ परिणाम सामने आए कि यह किताब मानव जीवन के विभिन्न आयामों पर पर्याप्त प्रकाश डालती है, जिन पर पारंपरिक और प्राचीन ज्योतिष में कभी चर्चा नहीं की गई थी।

यह अपने प्राचीन समकक्ष से कहीं अधिक छोटा है, यह दिन प्रतिदिन की घटनाएँ और आधुनिक जीवनशैली को कवर करती है। यह जानना आवश्यक है कि वास्तु, हस्तरेखा विज्ञान और कपाल विद्या भी काली किताब के महत्वपूर्ण भाग हैं।  

प्राचीन हिंदू संहिता जैसे बृहत संहिता और नारद संहिता से संबंधित बहुत से विषयों को इसमें समिमलित किया गया है।

काली किताब में दिए गए उपचार/उपाय सस्ते, सरल और तुरंत ही फल देने वाले होते हैं। इनका प्रभाव अविश्वनीय होता है।

ऐसा कहा जाता है कि ये उपाय कलयुग के अनुकूल है, जब किसी के पास न इतना समय है और न ही परिणाम प्राप्त करने का इंतज़ार करने का धैर्य। जैसा कि प्राचीन समय में अपनी हुंडली के ग्रहों की दशा और भाग्य को अपने अनुकूल करने के लिए यज्ञ, जाप, मंत्र आदि जैसे प्राचीन पद्तियों का सहारा लिया जाता था। वर्तमान समय में यह सब करना थोड़ा कठिन समझा जाता है।

इसमें दिए गए उपचार/उपाय बहुत ही सरल होते हैं जैसे– बहते हुए पानी में कुछ बहाना या घर में कुछ स्थापित करना। फिर भी सावधान रहें, यदि पर्याप्त अध्ययन न किया जाए या ठीक से प्रयोग न किया जाए, तो काली किताब के उपचार/उपाय जवाबी हमला कर सकते हैं।

इसलिए आपको यह सलाह दी जाती है कि यदि प्रयोग किए जा रहे किसी उपचार या उपाय का किसी भी प्रकार का नकारात्मक परिणाम आपको प्राप्त हो रहा है, तो इसे तुरंत ही रोक दें।

यह सत्य है कि काली किताब के लेखक द्वारा प्रयोग की गई भाषा रहस्यमय और तिलिस्मी होने के कारण समझनी बहुत ही दुष्कर और कठिन है।

फरमानों के पीछे के औचित्य, काली किताब के छंद/दोहे और उपचार/उपाय समझने भी बहुत ही कठिन है।

हमारे ज्योतिष जिनकी ज्योतिष पर अच्छी पकड़ और ज्ञान है, काली किताब के संबंध में नगण्य ही साबित होती है।

विश्वस्नीय जानकारी के अभाव के कारण, कुछ धूर्त लोग भ्रामक वातावरण का फायदा उठाकर लोगों का काली किताब के संदर्भ में गुमराह करने के काम में लगे हुए हैं।

इसी भ्रामकता को दूर करने के लिए कुछ सरल उपचार/उपाय नीचे दिए गए हैं –

  1. पीली सरसों, गुग्गल, लोबान और गोघृत इनको मिलाकर इनकी धूप बना लें और सूर्य अस्त होने के एक घंटे के भीतर उपला जलाकर उसमें डाल दें। 21 दिन तक लगातार ऐसा करें, आपके घर से नकारात्मक शक्तियाँ स्वयं चली जाएंगी।
  2. गऊ, लोचन और तगर सभी थोड़ी–थोड़ी मात्रा में लेकर एक लाल कपड़ें में बाँधकर पूजा के स्थान पर रखें। शिवजी की कृपा से आप पर किए गए समस्त जादू–टोने का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
  3. जावित्री, गायत्री और केसर को कूटकर गुग्गल के साथ मिलाकर धूप बना लें औा प्रतिदिन सुबह–शाम 21 दिन तक अपने घर में जलाएँ। आप पर किए तांत्रिक अभिकर्म की समाप्ति होगी।
  4. यदि आपको आशंका है कि कोई आपको मारना चाहता है, तो पीपल के 21 बीज लेकर शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं तथा धूप बत्ती करें। इसके प्श्वात शिवलिंग के पास बैठकर बीज अपने सामने रखें। अपना नाम व गोत्र का उच्चारण करते हुए शिव से अपनी रक्षा की प्रार्थना करे और एक माला महामृत्युंजय मंत्र की जपें। इसके बाद बीजों को एकत्र करके तांबे के ताबीज़ में डालकर अपने गले में पहनें।
  5. यदि कोई शत्रु आपको अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है, तो एक नींबू को चार भागों में काटकर चैराहे पर खड़े होकर अपने इष्ट देव का स्मरण करते हुए चारों दिशाओं में एक–एक भाग फेंक दें। पीछे मुड़कर न देखें और घर आकर हाथ–पैर अच्छे से धो लें। किसी भी तांत्रिक अभिकर्म से मुक्ति मिलेगी।
  6. यदि आपको आशंका है कि आपके ऊपर किया ने कुछ जादम–टोना करवा दिया है, जिससे आपके व्यवसाय में बाधा और घर में क्लेश होता है। इससे बचने के लिए सवा किलो काले उड़द, सवा किलो कोयला को सवा मीटर काले कपड़े में बाँधकर अपने ऊपर से 21 बार वारकर शनिवार के दिन बहते हुए जल में विसर्जित करें और मन में हनुमान जी का ध्यान करें। 7 शनिवार तक निरंतर यह उपाय करने से आपके ऊपर के सभी नकरात्मक प्रभाव समाप्त हो जाएंगे।
  7. घर में सफाई का विशेष ध्यान रखें और पीपल के पत्ते से घर में 7 दिन तक निरंतर गौमूत्र के छींटे मारें और उसके बाद गुग्गल का  धूप जला कर पूरे घर में धूनी दें।
  8. शुक्ल पक्ष के बुधवार को चार गोमती चक्र अपने सिर पर से वारकर चारों दिशाओं में फेंक दें, तुरंत ही आप पर किए गए किसी भी जादू–टोने का प्रभाव समाप्त होगा।